जनसुनवाई में जनमत या प्रबंधन? अमाली कोलवाशरी पर उठे कई सवाल
संपादक -मनहरण कश्यप Gs news
कोटा,बिलासपुर/ ग्राम अमाली में प्रस्तावित मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड की कोलवाशरी परियोजना को लेकर आयोजित लोक जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तीखा विरोध दर्ज कराया। जनसुनवाई के बाद विरोधी पक्ष ने प्रशासनिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे जनभावनाओं के विपरीत बताया।
पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष आदित्य दीक्षित के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम शिव कुमार बनर्जी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा को ज्ञापन सौंपते हुए लिखित में दर्ज करते हुए कहा कि अमाली क्षेत्र में कोलवाशरी स्थापित करना पर्यावरण, कृषि और स्थानीय जनजीवन के लिए गंभीर खतरा साबित होगा। उनका कहना था कि जिस भूमि पर परियोजना प्रस्तावित है, वह कृषि उपयोग के नाम पर खरीदी गई थी, जबकि अब उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
प्रतिनिधियों ने यह भी तर्क दिया कि ग्राम पंचायत अमाली संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आती है, जहां पेसा एक्ट के प्रावधान लागू हैं। ऐसे में ग्रामसभा की सहमति और स्थानीय जनभावनाओं की अनदेखी कर परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं माना जा सकता।
विरोध करने वालों ने बताया कि प्रस्तावित कोलवाशरी से करीब 200 मीटर की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय संचालित है, जबकि अचानकमार टाइगर रिजर्व भी हवाई दूरी से लगभग 10 किलोमीटर पर स्थित है। उनका आरोप है कि कोलवाशरी से निकलने वाला प्रदूषण खेती, पर्यावरण, वन्यजीवों और स्थानीय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
"जनसुनवाई में जन की आवाज या बाहर से जुटाई गई भीड़ ?"
जनसुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा उस समय हुई जब विरोधी पक्ष ने आरोप लगाया कि परियोजना के समर्थन में कोरबा, दीपका और अन्य शहरों से लोगों को लाया गया था। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि स्थानीय ग्रामीण जहां परियोजना के खिलाफ अपनी बात रख रहे थे, वहीं बाहर से आए लोगों द्वारा समर्थन के स्वर बुलंद किए गए। इससे जनसुनवाई की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर बाउंसरों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे। ग्रामीणों का कहना था कि यदि परियोजना वास्तव में जनहित में है तो फिर जनसुनवाई में सुरक्षा के ऐसे प्रबंध और बाहरी समर्थन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
प्रशासन पर जिम्मेदारी का सवाल
आदित्य दीक्षित एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीणों और निर्वाचित प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया है। इसके बावजूद यदि प्रशासन परियोजना को अनापत्ति प्रदान करता है तो भविष्य में उत्पन्न होने वाले जनआक्रोश और सामाजिक तनाव की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनसुनवाई केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता की राय जानने का माध्यम है। यदि जनता की आवाज को सुनने के बजाय केवल प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया जाएगा तो ऐसे आयोजनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस अवसर पर संदीप शुक्ला, कुलवंत सिंह, मोहन प्रताप मरकाम, प्रभू जगत, देवेन्द्र कौशिक, जब्बार खान, कान्हा गुप्ता, दिलीप श्रीवास, कमलू कश्यप ,भरत पटेल, चोलाराम नायक, वसंत यादव, राजू सिदार, खिलावन पोर्ते, दुखीराम, कमल बिंझवार, महाराज सिंह, रामलोचन, सुन्दर साहू, सतीश जोशी, मनोज गुप्ता, राकेश गुप्ता, सालिक राम, प्रकाश मरकाम, कुलदीप यादव, चरन साहू, राजू साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
क्षेत्र में प्रस्तावित कोलवाशरी परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन जनभावनाओं को कितना महत्व देता है और जनसुनवाई से प्राप्त आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है।
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