गुरु-शिष्य की परंपरा शर्मसार: शिक्षक ने 15 वर्षीय छात्रा से किया दुष्कर्म, SP की फटकार के बाद FIR दर्ज

गुरु-शिष्य की परंपरा शर्मसार: शिक्षक ने 15 वर्षीय छात्रा से किया दुष्कर्म, SP की फटकार के बाद FIR दर्ज
संपादक -मनहरण कश्यप Gs news 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) न्यायधानी बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र से गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाली एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। एक निजी स्कूल के शिक्षक पर अपनी ही 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा को बहला-फुसलाकर होटल ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म (अनाचार) करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले ने न केवल शिक्षा जगत को शर्मसार किया है, बल्कि पुलिस प्रशासन की शुरुआती संवेदनहीनता और स्कूल प्रबंधन के रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किताब दिलाने के बहाने होटल ले गया आरोपी शिक्षक
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। सिरगिट्टी क्षेत्र के एक निजी स्कूल में पदस्थ शिक्षक राहुल बंगारु ने अपनी ही कक्षा की 15 वर्षीय छात्रा को किताब दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि वह छात्रा को बहला-फुसलाकर एक होटल में ले गया, जहां उसने नाबालिग की मर्जी के खिलाफ उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। घटना के बाद आरोपी शिक्षक ने पीड़िता को डराया-धमकाया और मुंह खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
डर के साये में रही पीड़िता, स्कूल प्रबंधन ने भी फेरा मुंह
आरोपी की धमकी से डरी और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही छात्रा लंबे समय तक चुप रही। वार्षिक परीक्षा समाप्त होने के बाद जब वह स्कूल में ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) लेने पहुंची, तब उसने हिम्मत जुटाई। छात्रा ने स्कूल के प्राचार्य (प्रिंसिपल) और अन्य शिक्षकों को अपने साथ हुई इस दरिंदगी की पूरी जानकारी दी।

संवेदनहीनता की हद: पीड़िता का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने इतनी संवेदनशील और गंभीर शिकायत को सुनने के बाद भी आरोपी शिक्षक पर कार्रवाई करने या पुलिस को सूचना देने के बजाय मामले को दबाने और नजरअंदाज करने का प्रयास किया।

थानों के चक्कर काटते रहे परिजन, SP के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई
स्कूल से न्याय न मिलने पर पीड़िता ने रोते हुए अपने परिजनों को आपबीती सुनाई। बदहवास परिजन तुरंत शिकायत लेकर सिरगिट्टी थाना पहुंचे। लेकिन, संवेदनशीलता दिखाने के बजाय पुलिस ने घटनास्थल के "अधिकार क्षेत्र" (Jurisdiction) का तकनीकी बहाना बना दिया। परिजनों का आरोप है कि नाबालिग पीड़िता को लेकर वे दिनभर इस थाने से उस थाने के चक्कर काटते रहे और पुलिस सीमा विवाद उलझाती रही।
जब इस पूरे मामले की भनक बिलासपुर पुलिस कप्तान (SP) को लगी, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कड़ा रुख अपनाया। SP ने संबंधित थाना प्रभारी को कड़ी फटकार लगाते हुए तुरंत जीरो में FIR दर्ज करने और आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जागृत हुई पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी शिक्षक राहुल बंगारु को गिरफ्तार कर लिया है।
व्यवस्था और सुरक्षा पर खड़े होते बड़े सवाल
यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि उस भरोसे पर गहरा आघात है जिसके तहत माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए स्कूल भेजते हैं। इस मामले ने कानून और समाज के सामने कुछ तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:
 कागजी संवेदनशीलता: क्या बच्चों की सुरक्षा और पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर मामलों में त्वरित कार्रवाई के नियम केवल फाइलों तक सीमित हैं?
 पीड़िता की प्रताड़ना: एक पीड़ित नाबालिग बच्ची को न्याय पाने के लिए थानों की चौखट पर क्यों भटकना पड़ा?
 स्कूलों की जवाबदेही: क्या बच्चों के संरक्षण की जिम्मेदारी उठाने वाले स्कूल प्रबंधन की इस मामले में आपराधिक चुप्पी पर कार्रवाई होगी?

यदि बिलासपुर पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप न करते, तो शायद यह मामला भी पुलिसिया लापरवाही की भेंट चढ़ जाता। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और मामले की आगे की विवेचना जारी है, लेकिन इस घटना ने पूरी सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है।

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