चार वर्षों से बिना कार्यकर्ता संचालित आंगनबाड़ी: कोटा परियोजना की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

चार वर्षों से बिना कार्यकर्ता संचालित आंगनबाड़ी: कोटा परियोजना की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

संपादक -मनहरण कश्यप की विशेष रिपोर्ट 

कोटा (बिलासपुर)। कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत कुरवार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले चार वर्षों से बिना नियमित कार्यकर्ता के संचालित हो रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि शासन की महत्वपूर्ण महिला एवं बाल विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों के अनुसार लगभग एक वर्ष पूर्व कार्यकर्ता नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। गांव की कई शिक्षित महिलाओं ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन जमा किए, लेकिन आज तक नियुक्ति नहीं हो सकी। सवाल यह है कि जब आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो आखिर चयन और नियुक्ति में इतनी देरी क्यों?
ग्रामीणों का आरोप है कि कोटा परियोजना कार्यालय की लापरवाही के कारण केंद्र वर्षों से अधर में लटका हुआ है। केंद्र में वर्तमान में केवल सहायिका के भरोसे काम चल रहा है, जो भोजन बनाने तक सीमित है। बच्चों की नियमित देखरेख, पोषण पर निगरानी, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को योजनाओं की जानकारी और लाभ—ये सभी जिम्मेदारियां कार्यकर्ता के अभाव में प्रभावित हो रही हैं।
केंद्र की भौतिक स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। आसपास सड़क और मवेशियों की आवाजाही से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। ऐसे में बिना कार्यकर्ता के संचालन न केवल अव्यवस्थित है बल्कि बच्चों की सुरक्षा के साथ भी समझौता है।
ग्राम पंचायत कुरवार के उपसरपंच शिवदयाल निर्मलकर ने बताया कि इस संबंध में परियोजना अधिकारी कोटा से संपर्क कर तत्काल नियुक्ति की मांग की गई थी। अधिकारी द्वारा शीघ्र नियुक्ति का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही नियुक्ति नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि गांव के बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य व भविष्य से जुड़ा संवेदनशील केंद्र है।
अब देखना यह है कि कोटा परियोजना के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब संज्ञान लेते हैं और कुरवार आंगनबाड़ी केंद्र को नियमित कार्यकर्ता उपलब्ध कराकर शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारते हैं या नहीं।

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