भोजली विसर्जन में उमड़ा उत्साह, लोकगीतों से गूंजा गांव
बैजनाथ पटेल की खास रिपोर्ट
कोनचरा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपरा का प्रतीक भोजली पर्व शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। ग्राम कोनचरा में आयोजित सार्वजनिक भोजली विसर्जन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
भोजली को सिर पर रखकर ग्रामीण पारंपरिक गीत गाते हुए विसर्जन स्थल तक पहुंचे। इस दौरान पूरे गांव का वातावरण छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भोजली का विसर्जन किया गया।
भोजली को छत्तीसगढ़ में हरियाली, अन्न, सुख-समृद्धि और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। भोजली पर्व के दौरान मितान बदने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो आपसी स्नेह और सामाजिक एकता का संदेश देती है।
ग्रामीणों ने भोजली माता से गांव में सुख-शांति, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की। आयोजन में ग्रामीणों की सहभागिता से कार्यक्रम यादगार बन गया।
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