विधायक निधि से बन रहा रंगमंच बना भ्रष्टाचार की मिसाल! निर्माण पूरा होने से पहले ही जर्जर, इंजीनियर ने दिए जांच और पुनर्निर्माण के संकेत
संपादक -मनहरण कश्यप
कोटा/सोनपुरी। विकासखंड कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनपुरी के आश्रित ग्राम ढोलमौहा स्थित ठाकुर देव स्थल पर विधायक निधि से लगभग 1.50 लाख रुपये की लागत से निर्मित किए जा रहे रंगमंच की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और लापरवाही बरती गई है, जिसके कारण रंगमंच निर्माणाधीन अवस्था में ही जर्जर दिखाई देने लगा है।
बताया जा रहा है कि रंगमंच के खंभों (कॉलम) की भराई एवं मजबूती का कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। वहीं छत की ढलाई (लेंटर) के बाद जब सेंटरिंग खोली गई तो पूरी संरचना कमजोर नजर आने लगी। स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि लेंटर के गिरने की आशंका के चलते उसे अस्थायी रूप से बल्लियों के सहारे टिकाकर रखा गया है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि विधायक मद से निर्मित होने वाले ऐसे कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, लेकिन यहां निर्माण कार्य शुरू से ही मानकों की अनदेखी कर किया गया है। लोगों का आरोप है कि शासन की राशि का दुरुपयोग कर घटिया निर्माण कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
मामले में संबंधित उप अभियंता श्री कैवर्त से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बताया कि वे स्वयं स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और इस प्रकार का कार्य स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें बिना उचित जानकारी दिए निर्माण कराया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो संबंधित हिस्से को तुड़वाकर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाएगा।
इंजीनियर के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ निर्माण कार्य को पुनः कराने की नौबत आ सकती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि शासन की राशि का सदुपयोग हो सके और जनता को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य उपलब्ध कराया जा सके।
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