सोनपुरी शा प्रा व मां शाला में धूमधाम से मनाया गया शाला प्रवेश उत्सव, नवप्रवेशी बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत
संपादक -मनहरण कश्यप Gs news
कोटा/सोनपुरी। शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला सोनपुरी में शाला प्रवेश उत्सव उत्साह, उमंग और गरिमामय वातावरण के बीच मनाया गया। कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर भव्य स्वागत किया गया। विद्यालय परिसर बच्चों की मुस्कान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और शिक्षा के प्रति जागरूकता के संदेशों से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें एवं गणवेश वितरित किए गए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत सोनपुरी के सरपंच सुनील कुमार भानु थे। विशेष अतिथियों में नई दुनिया संवाददाता मनहरण कश्यप, पूर्व सरपंच गजाधर पैकरा, मदनलाल गंधर्व, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष शिवचरण कश्यप, उपाध्यक्ष देवी भानु, विमला भानू, शिवकुमार, पंच बिसाहू, ईश्वर भानु, समरतिया भानु, सरस्वती, सीमा, सुशीला,अघनू भानू संकुल समन्वयक आनंद यादव, शिक्षक प्रेम पैकरा, फिरत लाल जांगड़े, भृत्य सुनीता पैकरा, तीजराम भानु सहित विद्यालय स्टाफ, पालकगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन शिक्षक रवि प्रताप सिंह ने किया।
इस अवसर पर अतिथियों ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने, मन लगाकर अध्ययन करने तथा अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए प्रेरित किया।
अपने प्रेरक उद्बोधन में नई दुनिया संवाददाता मनहरण कश्यप ने शासन की शाला प्रवेश उत्सव एवं निःशुल्क गणवेश वितरण जैसी जनहितैषी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में समानता और सामाजिक समरसता स्थापित करने का भी सशक्त साधन है।
उन्होंने कहा कि पहले अभिभावक अपनी आर्थिक स्थिति और सामर्थ्य के अनुसार बच्चों को अलग-अलग प्रकार के कपड़े पहनाकर विद्यालय भेजते थे। इससे बच्चों के बीच अमीर-गरीब, छोटे-बड़े तथा ऊंच-नीच जैसी मानसिकताएं अनजाने में विकसित हो जाती थीं। कई बार बच्चों की पहचान उनके पहनावे से होने लगती थी, जिससे उनमें हीनभावना या श्रेष्ठता का भाव पैदा होता था।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा सभी विद्यार्थियों को एक समान गणवेश उपलब्ध कराए जाने से विद्यालयों में समानता की भावना मजबूत हुई है। अब सभी बच्चे एक जैसी वेशभूषा में विद्यालय आते हैं, जिससे किसी को गरीब या अमीर समझने का अवसर नहीं मिलता। गणवेश बच्चों में अनुशासन, एकता, आत्मविश्वास और सामाजिक समरसता का संदेश देता है तथा शिक्षा के मंदिर में सभी विद्यार्थियों को समान पहचान प्रदान करता है।
अंत में विद्यालय परिवार द्वारा सभी अतिथियों, पालकों एवं ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया गया। शाला प्रवेश उत्सव का समापन शिक्षा, समानता और उज्ज्वल भविष्य के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।
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