एवीएम में दो दिवसीय ‘सकारात्मक अनुशासन’ शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न"
संपादक -मनहरण कश्यप Gs news
बिलासपुर, 24 अप्रैल — आधारशिला विद्या मन्दिर न्यू सैनिक स्कूल में दिनांक 23 एवं 24 अप्रैल को “सकारात्मक अनुशासन” विषय पर दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को छात्रों के साथ सकारात्मक, सहानुभूतिपूर्ण एवं प्रभावी व्यवहार विकसित करने हेतु आवश्यक कौशलों से सशक्त बनाना था, साथ ही पारंपरिक दंडात्मक पद्धतियों के स्थान पर सकारात्मक एवं रचनात्मक अनुशासन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य रहा।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में काउंसलिंग मनोवैज्ञानिक एवं व्यवहार प्रशिक्षक श्री शांति स्वरूप श्रीरामूला (Hyderabad से ) विशेषज्ञ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को सकारात्मक अनुशासन के सिद्धांतों, प्रभावी कक्षा प्रबंधन तकनीकों तथा छात्रों के व्यवहार को समझने एवं सुधारने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया। shri Shanti एक्सपर्ट psychologist हैं jinhone khud teaching और principal की भूमिका bakhubi nibhai है।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ ने विशेष रूप से “Telling की जगह Asking Methodology” अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि शिक्षण प्रक्रिया में केवल निर्देश (orders) देना या एकतरफा संवाद करना प्रभावी नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों को प्रश्नों के माध्यम से जोड़ना अधिक सार्थक होता है।
उन्होंने शिक्षकों को यह समझाया कि:
विद्यार्थियों को आदेश देने के बजाय उनसे प्रश्न पूछकर (Questioning Technique) उन्हें सोचने, समझने और भागीदारी के लिए प्रेरित करना चाहिए।
“तुम ऐसा करो” कहने के स्थान पर “तुम्हें क्या लगता है, हमें क्या करना चाहिए?” जैसे प्रश्न छात्रों को जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
Asking Methodology विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और सक्रिय भागीदारी को बढ़ाती है।
इसके साथ ही विशेषज्ञ ने विभिन्न प्रकार के प्रश्नों (Open-ended, Reflective, Probing Questions) के महत्व को भी विस्तार से समझाया, जिससे विद्यार्थी केवल उत्तर देने तक सीमित न रहें, बल्कि गहराई से सोचने और अपने विचार व्यक्त करने के लिए प्रेरित हों।
प्रशिक्षण में “Connection Before Correction” के सिद्धांत पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के व्यवहार में सुधार करने से पहले उसके साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। जब शिक्षक और विद्यार्थी के बीच विश्वास एवं सम्मान का संबंध बनता है, तभी सुधारात्मक प्रक्रिया प्रभावी होती है।
विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि “बच्चों की प्रतिक्रिया (Reaction) हमारे व्यवहार (Action) पर निर्भर करती है”। यदि शिक्षक का व्यवहार स्पष्ट, सकारात्मक और संतुलित होगा, तो विद्यार्थियों से भी वैसी ही सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त होगी। इस विचार ने शिक्षकों को अपने व्यवहार और संप्रेषण शैली पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण के दौरान Praise (प्रशंसा) और Encouragement (प्रोत्साहन) की महत्ता पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञ ने बताया कि:
केवल परिणाम की प्रशंसा करने के बजाय प्रयास (effort) की सराहना करना अधिक प्रभावी होता है।
सकारात्मक शब्दों और प्रोत्साहन से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं।
निरंतर प्रोत्साहन से कक्षा का वातावरण सहयोगात्मक, सुरक्षित और प्रेरणादायक बनता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के निदेशक श्री एस. के. जनास्वामी द्वारा विशेषज्ञ का स्वागत कर किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “सकारात्मक अनुशासन छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है और यह कक्षा में स्वस्थ एवं सहयोगात्मक वातावरण निर्माण में सहायक होता है।”
दोनों दिनों में आयोजित सत्रों के दौरान शिक्षकों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान दिया गया, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया गया। समूह चर्चा, भूमिका-अभिनय (Role Play) तथा केस स्टडी के माध्यम से शिक्षकों ने इन तकनीकों का अभ्यास किया और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने के तरीके सीखे।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रतिभागी शिक्षकों द्वारा अपने-अपने कक्षा-कक्ष में सकारात्मक अनुशासन लागू करने हेतु विस्तृत कार्य योजना (Action Plan) तैयार की गई, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रशिक्षण के सिद्धांत व्यवहार में भी प्रभावी रूप से लागू हों।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा उन्होंने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। सभी शिक्षकों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक एवं व्यवहारिक बताया।
विद्यालय के चेयरमेन डॉ. अजय श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में शिक्षकों से आग्रह किया कि वे दंडात्मक तरीकों के स्थान पर प्रेम, सहानुभूति और समझ पर आधारित शिक्षण अपनाएँ, जिससे विद्यालय का वातावरण और अधिक सकारात्मक एवं प्रेरणादायक बन सके।
निदेशक श्री एस. के. जनास्वामी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों के कौशल को निखारते हैं और उन्हें आधुनिक शिक्षण तकनीकों से परिचित कराते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को सीखी गई बातों को अपने कक्षा-कक्ष में लागू करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती जी. आर. मधुलिका ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षक नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और नवाचार के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे तथा विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करेंगे। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहाँ सभी प्रतिभागियों ने सकारात्मक अनुशासन को अपने शिक्षण कार्य में प्रभावी रूप से अपनाने का संकल्प लिया
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