माँ नर्मदा के पावन उद्गम स्थल उपका में विराट हिंदू सम्मेलन संपन्न, सनातनी एकता और सांस्कृतिक चेतना का भव्य संगम
संपादक -मनहरण कश्यप की खास रिपोर्ट
कोटा/विकासखंड कोटा अंतर्गत माँ नर्मदा के पावन उद्गम स्थल उपका मंदिर परिसर में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर टेंगनमाड़ा–उपका क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में सनातनी हिंदू समाज के लोग एकत्रित हुए और धार्मिक, सांस्कृतिक व राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण का साक्षी बने।
माँ नर्मदा की पवित्र धरा ग्राम उपका स्थित नर्मदा मंदिर प्रांगण में टेंगनमाडा़ मंडल अंतर्गत सभी सनातनी समाज के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस सम्मेलन की शुरुआत भारत माता के चित्र पर पुष्पमाला अर्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इसके पश्चात अतिथियों एवं वरिष्ठजनों का श्रीफल व वस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया।
सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों ने बारी-बारी से अपने उद्बोधन में सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण में हिंदू समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रखर हिंदुत्ववादी, देशभक्ति से ओतप्रोत एवं ऊर्जावान युवा प्रेरणास्रोत श्री संतोष यादव जी का ओजस्वी एवं प्रेरक उद्बोधन रहा। उन्होंने “हिंदू” शब्द की व्यापक व्याख्या करते हुए हिंदू धर्म, संगठन, संस्कार और सामाजिक समरसता के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे, जिसे उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से सराहा।
कार्यक्रम में स्थानीय स्कूली बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक सुआ नृत्य ने सभी का मन मोह लिया और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। समापन अवसर पर भारत माता की आरती संपन्न हुई, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
इस विराट हिंदू सम्मेलन में आयोजन मंडल समिति अध्यक्ष निरंजन सिंह पैकरा (कृषि स्थाई समिति सभापति जिला पंचायत बिलासपुर), मुख्य वक्ता संतोष कुमार यादव, मुख्य अतिथि ईश्वर उरैती (सरपंच प्रतिनिधि, उपका), संयोजक रामखिलावन यादव, सहसंयोजक मनहरण कश्यप, संचालनकर्ता भानु प्रताप कश्यप, अवधेश कश्यप, समेलाल यादव, संतोष यादव, संतराम जायसवाल, प्रेम लाल यादव, पंडित जी (करवा), डॉक्टर प्रकाश जायसवाल (रतनपुर), संजीव जायसवाल (मोहंदा), संदीप जायसवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, माताएं-बहनें, युवा एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन सनातन संस्कृति की मजबूती, सामाजिक एकता और राष्ट्रप्रेम के संकल्प का सशक्त संदेश देने वाला रहा, जिसने क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान
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