ग्राम सोनपुरी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया लोकपर्व छेरछेरा

ग्राम सोनपुरी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया लोकपर्व छेरछेरा

सोनपुरी से विनय कश्यप की खास रिपोर्ट 

सोनपुरी/भारत विविध लोक परंपराओं एवं तीज-त्योहारों का देश है। प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्ट लोक संस्कृति और लोकपर्व हैं। इन्हीं परंपराओं में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अलग पहचान है। छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, जहां किसान धान की फसल कटने के बाद अपनी खुशी को दान के माध्यम से साझा करते हैं, जिसे छेरछेरा पर्व के रूप में मनाया जाता है।
ग्राम सोनपुरी में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पौष पूर्णिमा के अवसर पर लोकपर्व छेरछेरा हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांव के सभी मोहल्लों में बच्चे, युवा एवं बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर छेरछेरा मांगने निकले। इस दौरान गलियों में बच्चों का पारंपरिक नारा—
‘छेर-छेरा कोठी के धान ल हेरते हेरा’
गूंजता रहा।
छेरछेरा पर्व के माध्यम से किसान अपनी नई फसल के धान का दान कर समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे एवं सद्भावना का संदेश देते हैं। ग्राम सोनपुरी में यह लोकपर्व सामाजिक समरसता और उत्सवधर्मिता के साथ मनाया गया।

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