कोनचरा ग्राम पंचायत में गौ-बाड़ा बना मिसाल, किसानों की फसलें और गौ-माता दोनों सुरक्षित
न्यूज़ रिपोर्ट - बैजनाथ पटेल (कोंनचरा)
प्रबंध संपादक - मनहरण कश्यप (GuruShishya News)
बेलगहना/कोनचरा। विकास खंड कोटा के ग्राम पंचायत कोनचरा में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सहयोग से बनाया गया गौ-बाड़ा अब पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन गया है। बाजार चौक के पास बने इस गौ-बाड़ा ने न केवल किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से बचाया है बल्कि सड़कों पर भटकने वाली गायों की जान भी सुरक्षित की है।
किसानों को बड़ी राहत
पहले किसानों की फसलें रातों-रात आवारा पशुओं द्वारा नष्ट कर दी जाती थीं। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से बने इस गौ-बाड़ा ने किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया है। अब रात के समय सभी आवारा गायों को यहां रखा जाता है और सुबह चरवाहों द्वारा उन्हें खुले चरागाह की ओर भेज दिया जाता है।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी
सड़कों पर भटकते पशुओं से अक्सर हादसे होते थे, जिससे वाहन चालकों और पशुओं दोनों की जान पर खतरा बना रहता था। गौ-बाड़ा बनने के बाद इस तरह की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
पशुओं की सुरक्षा और गाँव की स्वच्छता
गौ-बाड़ा से न केवल पशु सुरक्षित हैं बल्कि गाँव के बाजार और चौक-चौराहों पर स्वच्छता और अनुशासन भी बना है। आवारा पशुओं की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है।
पंचायत और ग्रामीणों का योगदान
इस सराहनीय कार्य को पंचायत की सक्रियता और ग्रामीणों के श्रमदान से पूरा किया गया। सभी ने मिलकर जनसहयोग से गौ-बाड़ा का निर्माण कराया। ग्रामीणों का कहना है कि यह उदाहरण साबित करता है कि यदि समाज और जनप्रतिनिधि मिलकर काम करें तो बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
अन्य गाँवों के लिए प्रेरणा
ग्रामीणों की कहना है कि हर पंचायत में इसी तरह का गौ-बाड़ा बनाया जाए। इसके लिए पंचायत फंड और जनसहयोग का उपयोग किया जा सकता है। इससे किसानों को राहत मिलेगी और गौ-माता की भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
संदेश:
गौ-बाड़ा किसानों की फसलों की सुरक्षा और गौ-सेवा का अनूठा उदाहरण है। यदि हर गाँव इस पहल को अपनाए तो यह पूरे समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
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