कागज़ों में विकास, ज़मीन पर कीचड़: कसईबहरा- उरांवपारा आज भी रास्ते का इंतज़ार में

कागज़ों में विकास, ज़मीन पर कीचड़: कसईबहरा- उरांवपारा आज भी रास्ते का इंतज़ार में

संपादक -मनहरण कश्यप Gs news 

कोटा (बिलासपुर)। विकासखंड कोटा के ग्राम पंचायत नगपुरा अंतर्गत कसईबहरा से उरांवपारा तक पहुंच मार्ग का अभाव आज भी ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। शासन के दावों और योजनाओं के बीच उरांवपारा के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधा—सड़क—के लिए जूझ रहे हैं।
मोहल्लेवासियों ने कलेक्टर जनदर्शन, कोटा विधायक श्रीवास्तव, सुशासन तिहार सहित कई मंचों पर आवेदन देकर गुहार लगाई, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। कागज़ों में विकास की लंबी-चौड़ी इबारतें लिखी जा रही हैं, पर ज़मीनी हकीकत में उरावपारा तक पहुंचने के लिए आज भी कोई रास्ता नहीं है।
जंगल क्षेत्र में बसे इस मोहल्ले में एक स्कूल भी संचालित है, जहां शिक्षकों को पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ती है। गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं। स्कूली बच्चों को मिडिल और हाई स्कूल के लिए दूर जाना पड़ता है, लेकिन रास्ता न होने से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
बरसात के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं। कीचड़ और पानी से घिरे इस इलाके में रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता है। राशन लेने के लिए नगपुरा पंचायत तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं।
विडंबना यह है कि आदिवासी बहुल इस मोहल्ले को योजनाओं का लाभ देने की बात तो बड़े-बड़े मंचों से कही जाती है, लेकिन जब पहुंचने का रास्ता ही नहीं है तो योजनाएं आखिर किसके लिए हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि “पहले सड़क तो मिले, फिर विकास की बातें भी अच्छी लगेंगी।” फिलहाल उरांवपारा के लिए विकास केवल घोषणाओं और फाइलों तक सीमित नजर आ रहा है।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन कागज़ों से निकलकर हकीकत की राह कब पकड़ता है, या फिर उरांवपारा यूं ही ‘विकास’ के इंतज़ार में पड़ा रहेगा।

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