जलवायु परिवर्तन एवं ग्लेशियर पिघलने के प्रति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
संपादक -मनहरण कश्यप Gs news
बिलासपुर/आधारशिला विद्या मंदिर सैनिक स्कूल, बिलासपुर के कैडेट्स के लिए “जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण संरक्षण” विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना तथा उन्हें पृथ्वी के बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने और समुद्र के बढ़ते जलस्तर जैसी वैश्विक समस्याओं के बारे में जानकारी देना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैप्टन जेम्स डी. बिशप उपस्थित रहे। कैप्टन जेम्स डी. बिशप द नेचर पीपल नेटवर्क में जलवायु शिक्षा परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। वे अमेरिकन एयरलाइंस के पूर्व एयरलाइन पायलट तथा हवाईयन एयरलाइंस में उड़ान संचालन के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण और जलवायु शिक्षा के क्षेत्र में उनका अनुभव और योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
अपने संबोधन में कैप्टन जेम्स डी. बिशप ने कैडेट्स को जलवायु परिवर्तन की गंभीरता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1880 के बाद से पृथ्वी के औसत तापमान में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह वृद्धि मानव गतिविधियों के कारण हो रही है, जिनमें अत्यधिक औद्योगिकीकरण, वनों की कटाई और प्रदूषण प्रमुख हैं। तापमान में यह वृद्धि पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित कर रही है और इसका सबसे बड़ा प्रभाव ग्लेशियरों के पिघलने के रूप में दिखाई दे रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अलास्का सहित दुनिया के कई हिमनदी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। इन ग्लेशियरों के पिघलने से बड़ी मात्रा में पानी समुद्र में जा रहा है, जिसके कारण समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यदि यह स्थिति इसी प्रकार बनी रही तो आने वाले समय में कई तटीय क्षेत्रों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव, सूखा, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएँ भी बढ़ रही हैं।
कैप्टन बिशप ने कैडेट्स को प्रेरित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयास करें, जैसे अधिक से अधिक पेड़ लगाना, जल का संरक्षण करना, ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करना। उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और सक्रिय होगी, तो भविष्य में पृथ्वी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखना संभव होगा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यह भी बताया कि प्रकृति मानव जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है। मनुष्य का अस्तित्व प्रकृति पर ही निर्भर करता है, इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह हमें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक भी बनाती है।
विद्यालय के चेयरमैन डॉ. अजय श्रीवास्तव ने अपने संदेश में कहा कि “पृथ्वी को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयास जैसे पेड़ लगाना, जल बचाना और प्रदूषण कम करना भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित कर सकता है। आज की युवा पीढ़ी यदि इस दिशा में संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन संभव है।”
विद्यालय के डायरेक्टर एस. के. जनस्वामी ने कहा कि “अनुशासन, जागरूकता और सामूहिक प्रयास के माध्यम से ही हम पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। कैडेट्स को चाहिए कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाएँ और समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएँ।”
विद्यालय की प्राचार्या जी. आर. मधुलिका ने अपने वक्तव्य में कहा कि “विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक है। यदि आज की युवा पीढ़ी प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक होगी तो भविष्य में पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सकेगा। विद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक विकास ही नहीं बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।”
कार्यक्रम के अंत में कैडेट्स ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने यह भी प्रतिज्ञा ली कि वे अपने दैनिक जीवन में ऐसे कार्य करेंगे जो प्रकृति के संरक्षण और पृथ्वी के संतुलन को बनाए रखने में सहायक हों। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना को सुदृढ़ किया।
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