स्व. पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल जी की जयंती पर विशेष संपादकीय * मनहरण कश्यप - संपादक, गुरुशिष्य न्यूज़
जब-जब कोटा की राजनीति धड़कती है, बाबूजी की याद आ जाती है
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बनते, बल्कि जन-जन की स्मृतियों में धड़कन बनकर जीवित रहते हैं। कोटा विधानसभा के अजेय योद्धा, विकास पुरुष, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष तथा अनेक विभागों के केबिनेट मंत्री रहे परम पूज्य, परम सम्माननीय स्वर्गीय पंडित राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल जी ऐसे ही महापुरुष थे।
उनकी जयंती पर शब्द कम पड़ जाते हैं और भावनाएँ उमड़ पड़ती हैं।
मेरे जीवन का पहला वोट, मेरी राजनीतिक चेतना की पहली दस्तक, और पहली बार किसी नेता का एजेंट बनने का सौभाग्य—यह सब यदि किसी एक नाम से जुड़ा है, तो वह नाम है स्वर्गीय पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल जी। मेरे जैसे असंख्य कार्यकर्ताओं के लिए वे नेता नहीं, बाबूजी थे—संरक्षक, मार्गदर्शक और परिवार के वरिष्ठ सदस्य।
अकाल से अन्नदाता तक का सफर—शुक्ल जी की भागीरथी देन
आज जब टेंगनमाड़ा, बिटकुली, डांडबछाली, रिगरिगा, नगोई, लमरीडबरी, सोनपुरी, ढोलमौहा, कुरवार, कटैयापारा, मिट्ठूनवागांव, सुखेना, कोनचरा और खोंगसरा, आमागोहन क्षेत्र के खेतों में लहलहाती फसलें दिखती हैं, तब यह केवल हरियाली नहीं होती—यह बाबूजी की दूरदृष्टि का जीवंत प्रमाण होती है।
कभी यह अंचल बारिश की बेरुख़ी से अकालग्रस्त रहा करता था। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा रहता था। लेकिन व्यापवर्तन योजना के अंतर्गत नहर निर्माण कराकर शुक्ल जी ने इस क्षेत्र के भाग्य की दिशा ही बदल दी।
आज कम वर्षा में भी नहर के पानी पर भरोसा है, और किसानों की मेहनत की गाढ़ी कमाई धान मंडियों में चमकती दिखाई देती है।
मंच से ही न्याय—ऐसे नेता अब कहां?
स्वर्गीय शुक्ल जी शायद उन गिने-चुने नेताओं में थे, जो मंच से ही अधिकारी, कर्मचारी या आम नागरिक की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई के लिए जाने जाते थे। न फाइलों का बहाना, न तारीख़ों का खेल—बस समस्या सुनी और समाधान का आदेश।
इसीलिए कांग्रेस का हर कार्यकर्ता, हर ग्रामीण, हर किसान उन्हें सम्मान से नहीं, अपनेपन से “बाबूजी” कहता था।
आज भी उनकी कमी हर मोड़ पर महसूस होती है
आज जब कोटा विधानसभा राजनीतिक हलचलों से गुजरती है, जब समस्याएँ सिर उठाती हैं, तब मन अनायास ही कह उठता है—
काश… आज बाबूजी होते।
तो शायद बिजली, सड़क, पानी, स्कूल,आवास , पेंशन,गरीबों तथा मरीजों को सहायता राशि, बेरोजगारों को रोजगार जैसी मूल समस्याओं के लिए हमें यूँ भटकना न पड़ता।
उनके कार्यकाल में जो विकास हुए, जो आधारशिला रखी गई, वह आज भी मिसाल है। सच कहूँ तो—
इतना विकास शायद आज के समय में सोचना भी कठिन है।
एक नेता नहीं, एक युग थे बाबूजी
स्वर्गीय पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल जी कोई साधारण जनप्रतिनिधि नहीं थे। वे भगवान स्वरूप अवतार थे, जिन्होंने भागीरथी प्रयास कर कोटा विधानसभा में विकास की गंगा बहाई।
उनका नाम अमर है, अमर रहेगा—क्योंकि उन्होंने इमारतें नहीं, भरोसा और भविष्य बनाया।
हृदय से नमन
आज उनकी जयंती पर, मैं—
मनहरण कश्यप,
संपादक, गुरुशिष्य न्यूज़,
अपने गुरु समान बाबूजी को हृदय से नमन, श्रद्धा-सुमन और कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ।
बाबूजी,
आप नहीं हैं—
लेकिन कोटा की मिट्टी में, नहर के पानी में, खेतों की हरियाली में और हमारे दिलों में आप सदा जीवित हैं।
गुरुशिष्य न्यूज़, संपादक- मनहरण कश्यप
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