कोटा एसडीएम ने किया रतनपुर स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण
रतनपुर से ताहिर अली की रिपोर्ट
Managing Editor- Manharan Kashyap
रतनपुर..रतनपुर अस्पताल निरीक्षण में सामने आईं गंभीर खामियां,डायरिया फैलने के बावजूद अव्यवस्था चरम पर,
SDM ने दिए तत्काल सुधार के निर्देश।रतनपुर में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। डायरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और हर दिन दर्जनों मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बदहाली का शिकार है। गुरुवार की रात 12 बजे जब कोटा SDM नितिन तिवारी अचानक अस्पताल पहुंचे, तो जो दृश्य सामने आया उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी—ड्रेसिंग रूम में बारिश का गंदा पानी जमा था, परिसर गंदगी से भरा हुआ और संसाधनों की भारी कमी साफ झलक रही थी।
स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए कोटा SDM नितिन तिवारी गुरुवार रात 12 बजे खुद रतनपुरसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचे। क्षेत्र में डायरिया के बढ़ते मामलों की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने औचक निरीक्षण का निर्णय लिया था।लेकिन अस्पताल पहुंचते ही जो दृश्य सामने आया, उसने न सिर्फ प्रशासन को चौकाया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को भी उजागर कर दिया।
ड्रेसिंग रूम में बारिश का पानी, चारों ओर गंदगी
SDM को सबसे पहले ड्रेसिंग रूम में भरा बारिश का गंदा पानी दिखाई दिया। वहां इलाज की व्यवस्था तो दूर, साफ खड़े होने की जगह तक नहीं थी। वहीं अस्पताल परिसर में भी जगह-जगह कीचड़ और कचरा फैला मिला, जो संक्रमण फैलाने के लिए काफी है।
यह हालत उस समय सामने आई है जब रतनपुर क्षेत्र में हर रोज़ 12 से 15 डायरिया के नए मरीज सामने आ रहे हैं।
लोग बीमार हो रहे हैं, इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन अस्पताल की हालत खुद बीमार है।
BMO को लगाई फटकार, दिए सख्त निर्देश
SDM नितिन तिवारी ने मौके पर ही बीएमओ को कड़ी फटकार लगाई और ड्रेसिंग रूम की तत्काल मरम्मत, अस्पताल की सफाई और स्टाफ की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ज़िम्मेदारों पर कार्रवाई तय है।
एक डॉक्टर पर चार दिन से पूरा बोझ
चौंकाने वाली बात सामने आई कि पिछले चार दिनों से अस्पताल में सिर्फ एक डॉक्टर लगातार ड्यूटी पर है स्टाप की कमी है लगता की सिस्टम ही बीमार है ।
जबकि डायरिया जैसे गंभीर संक्रमण में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ।
बता दें की अन्य डॉक्टर कभी-कभार आते हैं, और जब उनका “मन नहीं लगता”, तो बिना सूचना दिए लौट जाते हैं। इससे स्थानीय लोगों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
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