ग्राम लठौरी के बच्चे अधूरे पुल की वजह से जान जोखिम में डालकर कर जा रहे स्कूल
मनहरण कश्यप की खास रिपोर्ट
कोटा/ विकास खंड कोटा अंतर्गत ग्राम लठौरी में बैगा जनजाति के बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ी है अधूरी पड़ी अरपा नदी की पुलिया। यहां के बच्चे हर रोज अपनी जान जोखिम में डालकर अरपा नदी पार करते हैं, ताकि वे मिडिल स्कूल की पढ़ाई के लिए आमागोहन या मोहली गांव पहुंच सकें।
गांव में केवल कक्षा पाँचवीं तक की ही पढ़ाई उपलब्ध है। इसके बाद बच्चों को आगे की शिक्षा के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है। लेकिन नदी पर न तो कोई पुल है, न नाव, और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था। बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जब नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है।
अरपा नदी पर एक पुल निर्माण की शुरुआत तो हुई थी, लेकिन वह वर्षों से अधूरी ही पड़ी है। यह अधूरा पुल ग्रामीणों की उम्मीद का केंद्र था – जो अब उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है। यदि यह पुल समय पर बन गया होता तो न केवल बच्चों की शिक्षा सुलभ होती, बल्कि ग्रामीणों को बाजार, बैंक, अस्पताल आदि तक पहुंचने में भी बड़ी सुविधा मिलती।
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार पुल निर्माण को पूरा करने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामवासी चाहते हैं कि शासन और प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ही निर्माण कार्य को पूरा कराए।
यह केवल एक अधूरा पुल नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और विकास की राह में एक बड़ी रुकावट बन चुका है।
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