रतनपुर का गौरव: दिव्यांशु जायसवाल ने UPSC में रचा इतिहास, क्लास-1 पद पर नियुक्ति

रतनपुर का गौरव: दिव्यांशु जायसवाल ने UPSC में रचा इतिहास, क्लास-1 पद पर नियुक्ति
संपादक -मनहरण कश्यप की विशेष रिपोर्ट 

रतनपुर। दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से सपनों को हकीकत में बदलने वाले नगर के लाल दिव्यांशु जायसवाल ने वह कर दिखाया, जिस पर पूरे क्षेत्र को गर्व है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा–2023 के आधार पर उनका चयन माय भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार में असिस्टेंट डायरेक्टर (क्लास-1) पद पर हुआ है। वे रतनपुर के पहले युवक हैं जिन्होंने UPSC में चयनित होकर नगर के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है।
यह सफलता उन्हें पाँचवें प्रयास में मिली। उनका वैकल्पिक विषय प्रबंधन था। दिव्यांशु की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
शिक्षा में निरंतर उत्कृष्टता
दिव्यांशु बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर रतनपुर से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, मल्हार से पूरी की।
उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने आईआईटी रुड़की से बी.टेक किया, जहां उन्हें इंस्टीट्यूट मेडल से सम्मानित किया गया। इसके बाद आईआईटी बॉम्बे से एम.टेक किया और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सिल्वर मेडल प्राप्त किया।
वर्तमान में वे स्वतंत्र डेटा साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत थे, लेकिन उनके मन में सदैव सार्वजनिक सेवा की भावना रही।
प्रेरणा और समर्पण की कहानी
दिव्यांशु ने बताया कि उनके नानाजी स्वर्गीय श्री के.एस. गमे से उन्हें समाजसेवा की प्रेरणा मिली, जिसने उन्हें निजी क्षेत्र से सार्वजनिक सेवा की ओर अग्रसर किया। वे अपनी सफलता का श्रेय माँ महामाया देवी की कृपा, माता-पिता के आशीर्वाद, परिवार और मित्रों के अटूट सहयोग को देते हैं।
दिव्यांशु, वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सुनील जायसवाल एवं डॉ. नीलिमा जायसवाल के सुपुत्र हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरे रतनपुर में हर्ष और उत्साह का वातावरण है। विद्यालय परिवार, मित्रगण एवं क्षेत्रवासियों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
दिव्यांशु जायसवाल की सफलता यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर है। निरंतर प्रयास, सही मार्गदर्शन और अटूट आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
रतनपुर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने नगर का मान बढ़ाया है और आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दी है।

Post a Comment

0 Comments