“बजट 2026 ‘संकल्प’ में कोटा व आदिवासी क्षेत्रों की उपेक्षा” – विधायक अटल श्रीवास्तव
संपादक -मनहरण कश्यप की विशेष रिपोर्ट
कोटा। अटल श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 “SANKALP” पर सुझावात्मक एवं आलोचनात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट में कुछ घोषणाएँ स्वागतयोग्य हैं, किन्तु यह ग्रामीण, आदिवासी एवं वंचित वर्गों की मूल अपेक्षाओं को पूर्ण रूप से संबोधित नहीं करता।
उन्होंने कहा कि कोटा विधानसभा क्षेत्र ST एवं SC बहुल क्षेत्र है, जहाँ विकास की प्राथमिकता शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण होना चाहिए था, लेकिन बजट में इन बिंदुओं पर अपेक्षित प्रावधान नहीं दिखता।
कोटा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दे
रतनपुर का संरक्षण एवं विकास
प्राचीन राजधानी एवं “तालाबों का शहर” के रूप में प्रसिद्ध रतनपुर के ऐतिहासिक तालाबों और धरोहरों के संरक्षण हेतु विशेष पैकेज की आवश्यकता बताई गई।
सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना
क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए भारत भवन की तर्ज पर सांस्कृतिक परिसर स्थापित करने की मांग की गई।
माँ महामाया विश्वविद्यालय की मांग
शक्ति पीठ माँ महामाया मंदिर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना से शिक्षा एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की बात कही गई।
खेल परिसर की स्थापना
शिवतराई क्षेत्र से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर रहे हैं तथा कबड्डी अत्यंत लोकप्रिय है। कोटा में आधुनिक खेल परिसर हेतु बजट प्रावधान किए जाने की मांग रखी गई।
पर्यटन विकास
पेंड्रा, बेलगहना एवं आसपास के वन क्षेत्रों को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए पूरक बजट की आवश्यकता बताई गई।
बजट की प्रमुख कमियाँ
नए पदों की भर्ती का उल्लेख नहीं: शासकीय विभागों में रिक्त पदों की भर्ती को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं, जिससे युवाओं में निराशा है।
मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि नहीं: जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएँ देने वाली कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि न होना निराशाजनक बताया।
बेरोजगारी भत्ता का उल्लेख नहीं: शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए किसी आर्थिक सहायता योजना का प्रावधान नहीं।
ग्रामीण रोजगार पर स्पष्ट रोडमैप का अभाव: रोजगार सृजन के ठोस एवं समयबद्ध कार्यक्रमों की कमी दर्शाई गई।
श्री श्रीवास्तव ने कहा कि इंडियन नेशनल कांग्रेस सदन से लेकर सड़क तक जनता के मुद्दों को उठाती रहेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि “संकल्प” केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर परिणाम भी दे।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरक बजट में कोटा विधानसभा क्षेत्र सहित आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएँ, ताकि विकास वास्तव में समावेशी, न्यायपूर्ण और जनहितकारी हो।
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